चर्चित लेख

Latest from Trending Articles

क्या वास्तव में अनुसूचित जातियां शूद्र नहीं?

यह फ़ोटो एक अंग्रेज ने 1920 में खिंची थी। जिसमे बताया गया है कि एक Cast Girl (वर्ण व्यवस्था में सम्मलित महिला) दूसरी Out Cast (वर्ण व्यवस्था से बाहर की महिला)…

Read More

भारत के विकास में बाधा ये द्रोणाचार्य और उनकी जातिवादी मीडिया

गुरु द्रोणाचार्य ने भविष्यवाणी कर दी कि उनके प्रिय शिष्य अर्जुन जैसा निशानेबाज धनुर्धर दूसरा कोई नहीं होगा। ठीक उसी तरह आधुनिक भारत के द्रोणाचार्यों और उनकी…

Read More

बहुजन समाज पार्टी की हरियाणा प्रदेश की पिछले 38 सालों की कारगुजारी

कुछ प्रकांड विद्वान बीएसपी के बारे में ये सोचते हैं कि हम सिर्फ़ बहनजी की वाह-वाई करके ही सरकार बना लेंगे। इसके साथ-साथ  बीएसपी के अलावा कोई दूसरा सामाजिक…

Read More

अम्बेडकर सरनेम बाबासाहब को किसी ब्राह्मण ने नहीं तो आखिर किसने दिया?

अगर अम्बेडकर सरनेम किसी ब्राह्मण ने बाबा साहब को नहीं दिया था तो आखिर किसने दिया? जानिये इस लेख के माध्यम से। मुझे सन 1950  से पहले के कुछ दस्तावेज चाहिए…

Read More

संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष बने बाबासाहेब डॉ. भीम राव अम्बेडकर, एक लेख

संविधान निर्माण के इतिहास में 29 अगस्त का दिन एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज है। 29.08.1947 के दिन ही संविधान सभा ने संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए…

Read More

जुल्मी जातियों की आर्थिक, धार्मिक व राजनीतिक शक्ति आखिर मिलती कहाँ से हैं?

देश में आए दिन दलितों पर जुल्मी सवर्ण जातियों द्वारा हर क्षेत्र में भेदभाव, अन्यान्य, अत्याचार किए जा रहे हैं। ऐसी घटनाओं के समय दलित वंचित समाज में आक्रोश…

Read More

विश्व आदिवासी दिवस क्या है?

सर्वप्रथम आदिवासी दिवस की मानव विकास संस्थान की ओर से भारत सहित समस्त दुनिया के  " जल,जंगल ,जमीन के संरक्षण में सदैव से लगे हुए, प्रकृति के सच्चे रखवाले,…

Read More

कांशीराम जी‌ की सोच एक अवसरवादी नेता

माननीय कांशीराम की नीति, नियम, रणनीति एवं नियत में फर्क के कारण अवसरवाद का जन्म हुआ, अवसरवादी सोच के लोग अंबेडकरवादी कैसे हो सकते हैं। यह चिंतन का विषय है।…

Read More

बहुजन समाज के तीन कप्तान, दलित पिछड़ा और मुसलमान

हमारी विचाराधारा एक है, तो हमारी पार्टी भी एक ही है। इसलिए हमारे सर्वमान्य नेता के सन्दर्भ में कोई संशय नहीं होना चाहिए। राजनीतिक दल के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव…

Read More

भारत में 1950 से पहले और बाद में नारियों की स्थिति पर एक नज़र

भारत में आज नारी 18 वर्ष की आयु के बाद ही बालिग़ अर्थात विवाह योग्य मानी जाती है। परंतु मशहूर अमेरिकन इतिहासकार कैथरीन मायो (Katherine Mayo) ने अपनी बहुचर्चित…

Read More

रोचक तथ्य

दारु की बोतल - समाज के लिए एक प्रेरणादायक कहानी

 एक ठाकुर के खेत में बहुत सारी घास हो गई,  उसको साफ करने के लिए मजदूर चाहिए था। उसने अपने बेटे को गाँव में भेजा,  मजदूर मिल गया जो कि दलित था।…

24th Mar 2022

Ambedkar Jayanti 2022: अगर डॉ. अम्बेडकर संविधान सभा मे न होते तो?

ये तो सब जानते हैं, अगर डॉ. अंबेडकर ना होते तो आज दलितों का अधिकार नहीं होता। बाबा साहब ने अपना पूरा जीवन, दलितों के अधिकार, समाज की कुरुतियों और दलितों के…

14th Apr 2022

19 ऊंट की कहानी जिसे मजाक में मत लेना

एक गाँव में एक व्यक्ति के पास 19 ऊंट थे। एक दिन उस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी। मृत्यु के पश्चात वसीयत पढ़ी गयी। जिसमें लिखा था कि मेरे 19 ऊंटों में से आधे मेरे…

23rd May 2022