Why celebrate Republic Day

हम गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं और हमें संविधान की जरुरत क्यों पड़ी?

By Ritu Bhiva March 2, 2022 05:55 0 comments

 स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1947 के दिन हमारा देश आजाद हुआ जबकि 26 जनवरी 1950 को जिसे हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। हमारा संविधान लागू हुआ था क्योंकि 15 अगस्त 1947 से 25 नवंबर 1950 तक अंग्रेजों का कानून ही देश में लागू था। 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने सविधान सभा का गठन किया और 2 साल 11 महीने 18 दिन में डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने सविधान लिखा। वैसे तो 26 जनवरी 1950 के बाद से और अब तक सैकड़ों प्रोग्राम जो लाल किले में होते थे केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार द्वारा और स्कूलों में भी मनाए जाते हैं परंतु यह नहीं पता की  गणतंत्रता दिवस क्या है,  इसके पीछे की सच्चाई क्या है। लेकिन इसके पीछे अहम बात यह है कि भारत का संविधान किसने बनाया वह कौन व्यक्ति था जिसने भारत को गणतंत्र और स्वतंत्र किया और आजादी के प्रमुख नेता कौन थे। उन्होंने भारत को आज इस मुकाम तक पहुंचाया जिस व्यक्ति ने अपनी 10 साल की उम्र कम कर दी वह व्यक्ति कौन था।


वह व्यक्ति डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर थे

महामना भाग्य विधाता सिंबल ऑफ नॉलेज बोधिसत्व डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर थे एक मात्र यही भारत के सबसे पढ़े लिखे व्यक्ति थे (जिनका नाम विश्व के पांच विद्वानों में आता है)। जिन्होंने भारत का संविधान बनाया बाबा साहब को देश में क्यों नहीं जाना जाता क्योंकि वह शूद्र समाज से थे। अगर कोई ब्राह्मण क्षत्रिय धर्म का व्यक्ति  संविधान लिखता तो उसे भगवान का दर्जा दिया जाता और महात्मा गांधी जिसे हम राष्ट्रपिता कहते हैं, उससे भी ऊंचा दर्जा दिया जाता। यही सबसे बड़ा कारण था कि बाबा साहब को शूद्र  होने के कारण आज तक देश में बहुत कम ही लोग जानते हैं कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान लिखा था।

अंग्रेजों ने भारत सरकार को देश आजाद करने के बारे में कई बार कहा और कहा कि अपना एक ऐसा संविधान बनाओ ताकि जिसके आधार पर तुम देश को चला सको। अंग्रेजों ने भारतीयों को कुल 3 मौके दिए।  

1.  1927 में जब लार्ड बर्कन एंड ने भारतीयों को चुनौती दी थी और वह चुनौती स्वीकार कर ली गई थी तो उन्होंने कांग्रेस से कहा था, जो उस समय सबसे बड़ी शक्ति कांग्रेस हुआ करती थी। उसने संविधान बनाने का जिम्मा ले लिया और संविधान लिख भी दिया। वह व्यक्ति जिसने संविधान लिखा 'मोतीलाल नेहरू' F/O 'पङित जवाहरलाल नेहरू' थे। जिन्होंने संविधान इतनी अच्छी तरह से लिखा कि उसकी पूरे भारत में छी-छा छी-था हुई।
   
 भारत की एक बहुत बड़ी जनसंख्या शोषित पीड़ित दबे कुचले लोगों के रूप में उसका सीधा तिरस्कार किया और मुस्लिम लीग मुसलमानों ने भी इस का तिरस्कार किया क्योंकि इस संविधान के अंतर्गत केवल वही लोग वोट डाल सकते थे  जो पढ़ा लिखा होगा या किसी राजघराने से संबंध रखता हो या फिर जागीरदार हो। तो अंग्रेजों ने संविधान के बजाय उसे नेहरू रिपोर्ट कहा और छापा गया। लेकिन उसे अंग्रेजों से भी बड़ी झाड़ मिली।  

2. दूसरा मौका सन् 1930 में मिला था। जहां भारतीय गोलमेज सम्मेलन में शामिल हुए थे। वहां फिर से भारतीय संविधान लिखने में पूर्णतया विफल रहे और संविधान ना लिख सकें।  

3. तीसरा प्रयास सन् 1944 में Sapru कमेटी ने किया था। लेकिन कमेटी यह कार्य नहीं कर सकी और भारतीय संविधान, तीनों प्रयासों में नहीं लिखा गया।


अब यहाँ से यह प्रश्न निकलता है कि क्या भारतीय संविधान लिखने की योग्यता किसी भारतीय में नहीं थी।

 अब बात संविधान बनाने की आई थी तो कांग्रेस और गांधी जानते थे अगर बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को संविधान बनाने के लिए उन्हें संविधान सभा में लाया गया, तो वे दलितों को अधिकार देंगे और एससी एसटी ओबीसी के लोगों को अधिकार देंगे और उन्हें ऊपर उठाएंगे। क्योंकि बाबा साहब ने सभी देशों के संविधान पढ़ रखे थे। इसलिए उन्होंने बाबा साहब को संविधान सभा में नहीं आने दिया और उन्होंने यह कड़ी शर्त रख दी की पार्लियामेंट में वही व्यक्ति जाएगा जो जनता द्वारा इलेक्टेड होगा अर्थात चुनाव जीता हुआ होगा। क्योंकि वह जानते हैं  कि उस समय बाबा साहब को हम जितने नहीं देंगे। बाबा साहब दुखी हो गए थे तब "बंगाल से जो पूर्वी पाकिस्तान जिसे बांग्लादेश कहा जाता है वहां के जोगेंद्र नाथ मंडल जो चांडाल जाति से थे वह बाबा साहब के पास आए और कहा कि आप जैसूर और खुलला दो जगह थी, उस जगह से चुनाव लड़े। जहाँ सबसे ज्यादा मुस्लिम जाति के लोग रहते थे, वहाँ से चुनाव लड़े और बाबा साहब चुनाव जीत गए"। तो तब कांग्रेस के लोगों को पता चला कि बाबा साहब चुनाव जीत गए तो उन्होंने एक शर्त रखी थी कि जहां पर 50% से ज्यादा हिंदू होगे उसे भारत में शामिल कर लिया जाएगा और जहां 50% से ज्यादा मुसलमान होगे उसे पाकिस्तान में शामिल कर दिया जाएगा तो वहां पर मैसूर और खुल्ला जहां पर 50% से ज्यादा हिंदू थे कानून के समझौते का उल्लंघन करते हुए उसे पाकिस्तान में शामिल कर दिया। बाबा साहब वहां पर जीत गए थे उस कारण उन्हे और जोगेंद्र नाथ मंडल को पाकिस्तान में शामिल पार्लियामेंट का सदस्य बनना पड़ा जो बाबा साहब नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने कांग्रेस और नेहरू एण्ड गांधी की शिकायत अंग्रेजों से कर दी तब अंग्रेजों ने नेहरू एंड गांधी कंपनी को चुनौती दी कि आप बाबा साहब को संविधान सभा में नहीं रखोगे तो हम आपको आजादी नहीं देंगे तो इतनी कड़ी शर्त अंग्रेजों ने लगाई। 


नेहरू और गांधी को कहा कि आप दो ही काम कर सकते हो।

1.   जैसूर और खुल्ला को वापस समझौते के साथ भारत में शामिल करें।

2.   बाबा साहब को किसी भी जगह से खड़ा करके संविधान सभा में वापस बुलाइए और संविधान सभा का सदस्य बनाइए।  


पहली तो गांधी एंड नेहरू कंपनी ने अंग्रेजों द्वारा दी गई पहली शर्त को ठुकरा दिया और जो बंगाल अर्थात पूर्वी पाकिस्तान था उसे भारत में नहीं लिया और उसे पाकिस्तान में शामिल कर दिया और बाबा साहब को दूसरी शर्त के मुताबिक ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य जो कि मुंबई से जय कर वरिष्ठ एमपी था। उसकी सीट खाली कराकर बाबा साहब को दिया गया और उन्हें पार्लियामेंट में जगह दी गई और कांग्रेस कहती हैं कि बाबा साहब को हमने पार्लियामेंट में भेजा था पर यह नहीं जानते कैसे भेजा था। बाबा साहब जब पार्लियामेंट में आ गए तो "सरदार पटेल" ने सारे खिड़की दरवाजे बंद कर दिए और कहा देखता हूं कि अंबेडकर कहां से संविधान सभा के अंदर आता है यह इन संविधान सभा के 389 सदस्यों की सोच थी। जब बाबा साहब पार्लियामेंट में Selected होकर संविधान सभा में आए तो उस समय संविधान सभा में कुल 389 सदस्य उपस्थित थे। 


जिसके अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद एवं उपाध्यक्ष एच.सी. मुखर्जी और संवैधानिक सलाहकार बी. एन. राव को चुना गया था, जिसमें 13 समितियां बनाई गई।

1. संघ शक्ति समिति
2. संविधान समिति
3. राज्य समिति
4. राज्य और रियासत परामर्श समिति
5. मौलिक अधिकार एवं अल्पसंख्यक समिति
6. मौलिक अधिकार उपसमिति
7. प्रांतीय संविधान समिति
8. झंडा समिति
9. प्रक्रिया नियम समिति
10. सर्वोच्च न्यायालय संबंधित समिति
11.  प्रारूप सविधिक समिति
12. संविधान समीक्षा आयोग
13. प्रारूप समिति 


यानी ड्राफ्टिंग कमेटी में कुल 7 सदस्य थे।  

1. एन गोपाल स्वामी आयंगर
2. अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर
3. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी
4. बी.एल. मित्र
5. डी.पी. खेतान
6. सैयद मोहम्मद सादुल्लाह
7. डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर कमेटी के अध्यक्ष थे अर्थात चेयरमैन थे।  


स्वतंत्रता से पहले संविधान सभा में 389 सदस्य उपस्थित थे। परंतु स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा में 289 सदस्य रह गए। और संविधान सभा की पहली बैठक में 200 से भी कम सदस्य रह गए। जब बात संविधान बनाने की आए तो नेहरू और गांधी विदेशों में जाकर संविधान एक्सपर्ट को ढूंढने में लगे जो भारत का संविधान लिख सकें तो वह एक एक देश में गए।  जहां पर उन्हें संविधान का विशेषज्ञ (Prof. Dr. Philip Jenning) मिला जिसने और भी देशों के संविधान लिखे थे। और उन्होंने उसे भारत का संविधान लिखने के लिए कहा। वह व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि बाबा साहब का मित्र था, जो बाबा साहब के साथ लंदन यूनिवर्सिटी में पढ़ा था। उन्होंने नेहरू से कहा कि आपके देश में तो एक ऐसा महा मना सर्वश्रेष्ठ विद्वान उपस्थित है जो भारत का संविधान लिख सकता है तो नेहरू ने पूछा कि वह कौन है। तब उन्होंने जवाब दिया कि वह बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर है जो मेरे साथ ही पढ़ें थे और दुनिया के सबसे पढ़े लिखे व्यक्ति हैं। तो तब जाकर जवाहरलाल नेहरु की यह मजबूरी बन गई और उन्होंने बाबा साहब को ड्राफ्टिंग कमेटी के सातवें सदस्य के रूप में कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया।


संविधान के विशेषज्ञ (Professor. Dr. Philip Jenning) वह बाबा साहब से इतना प्रभावित क्यों थे वह बाबा साहब के दोस्त थे इसलिए नहीं बल्कि इसके पीछे तीन मुख्य कारण है।

1. बाबा साहब की शैक्षणिक योग्यता
(a) B.A. (Economic)
(b) M.A. (Economic)
(c) PhD. (Economic)
(d) M.Sc. (Economic)
(e) D.Sc. (Economic)
(f)Bar-at-Law

डिग्रियों के कारण उन्हें असाधारण भारतीय की पहचान मिली थी। उस दौर में उनके समक्ष कोई इतना पढ़ा लिखा व्यक्ति नहीं था।  

2. 1935 में बना गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के लिए तीन राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस हुई थी, उसमें बाबा साहब ने views और सुझाव दिए। उसका 50% प्रभाव गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 में लागू हुआ था। इस प्रकार पूरे विश्व में उनकी एक अलग Position और Power बनी जबकि भारत में उनके जैसा और कोई नहीं था।

3. बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा दिया गया Federation Vs Freedom विषय पर दिया गया भाषण जिसके कारण उन्हे world में एक नई विचारधारा की पहचान मिली थी।

इस कारण बाबा साहब को एक "Constitutional Expert" कहा जाता है।  


26 नवंबर 1949 को जिसे हम संविधान दिवस (Constitution Day) के रूप में मनाते हैं उस दिन बाबा साहब ने अपने स्पीच में कहा कि "लोकतंत्र कोई पौधा नहीं है जो कहीं भी विकसित हो जाता है अगर हर जगह विकसित हो जाता तो उसका विश्व में कुछ अंश तक विकास नहीं हुआ होता, तो संविधान के प्रति हमें सचेत रहना चाहिए ऐसा मैं सोचता हूं आपको सोचना चाहिए कि लोकतंत्र को सुरक्षित रखने के मार्ग में अनेक बाधाएं हैं उन्हें दूर करने के लिए क्या आपको कुछ सकारात्मक कदम नहीं उठाने हैं यदि इस अवलोकन के परिणाम में आप सचेत रहते हैं तो मैं अपने आपको धन्य मानूँगा और गर्व महसूस करूंगा कि मैंने भारतवर्ष का संविधान लिखा"

बाबा साहब ने इतना ही नहीं कहा उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि वास्तव में संविधान के उद्देश्य से राज्य के अंगो का निर्धारण  करना ही नहीं बल्कि उनके प्रतिकारों को सीमित करना भी है। क्योंकि इनके अंगों के प्रतिकार पर कोई सीमा नहीं लगाई जाएगी जैसे विधानमंडल को कानून बनाने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई कार्यपालिका को नियम पालन करवाने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई और न्यायपालिका को न्याय करने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई। अगर संविधान में इसकी सीमा निर्धारित नहीं की जाती तो कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधानमंडल और सर्वोच्च न्यायालय अपनी मनमानी करता और लोगों को न्याय नहीं देता इसलिए इनके ऊपर भी नियम बनाए गए और संविधान में लिखे गए।

"मैं महसूस करता हूं  कि संविधान अच्छा व कारगर है। वह लचीला है तथा इतना कठोर भी की शांति एवं युद्ध दोनों स्थिति में देश को संगठित रख सकता है वास्तव में मैं यह कहूं कि नए संविधान में देश की स्थिति बिगड़ती है। तो यह नहीं कहा जा सकता है कि संविधान गलत है बल्कि उसको चलाने वाले लोग गलत है बाबा साहब ने यह भविष्यवाणी 26 नवंबर 1949 को की थी जो आज लगभग सच "होते दिखाई दे रही है"। 


बाबा साहब ने कॉपी करके सविधान बनाया

महत्वपूर्ण प्रश्न अब यह उठता है कि बाबा साहब ने विभिन्न देशों से कॉपी करके सविधान बनाया  है वैसे इस बात को ज्यादातर स्वर्ण जातियों के लोग कहते हैं मैं उनको बताना चाहता हूं कि इसके लिए एक पुस्तक है जो लोकसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित की गई हैं यह बाबा साहब द्वारा लिखी गई है और इसके पेज नंबर 12 और 13 पर सटीक लिखा हुआ है कि बाबा साहब को संविधान निर्माता क्यों कहा जाता है और संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमेटी के 7 सदस्यों ने क्या-क्या किया था।
 
डॉक्टर अंबेडकर के नेतृत्व में प्रारूप समिति की पहली बैठक 30 अगस्त 1947 को हुई थी और डॉक्टर अंबेडकर और उनकी टीम ने 141 बैठकों में अंतरिम संविधान तैयार किया इस अवधि के दौरान अधिकांश अवसर पर डॉ. अंबेडकर को अकेले ही काम करना पडा था क्योंकि :

1. बी एल मित्र ने इस्तीफा दे दिया,
2. डीपी खेतान की मृत्यु हो गई, जिनके स्थान पर  एन. माधवराव  और टी. टी. कृष्णमाचारी को सदस्य बनाया गया जिनकी उपस्थिति नगण्य होती गई।  
3. एन गोपाल स्वामी आयंगर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री थे जो राज्य के काम में व्यस्त थे।  
4. सैयद मोहम्मद सादुल्लाह बीमार रहे।  
5. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी जी को हैदराबाद के दूत के रूप में नियुक्त किया गया।  
6. अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर  जिन का स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण दिल्ली से बाहर रहना पड़ा इस प्रकार सारा कार्य बाबा साहब को ही करना पड़ा।

 
क्योंकि बाबा साहब चाहते थे। कि दिए गए समय में भारत का संविधान लिख सकें और अपने दलित दबे कुचले भाइयों को अधिकार देकर ऊपर उठा सकें। 9 नवंबर 1946 को पहली बैठक हुई और 26 नवंबर 1949 को अंतिम बैठक हुई थी। जो 2 साल 11 महीने और 18 दिन में बनकर तैयार हुआ जिसके बाद 24 जनवरी 1950 को 284 सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किए और 26 जनवरी 1950 को संविधान हमारे पूरे भारतवर्ष में लागू हुआ।

संविधान सभा के प्रारूप समिति के सदस्य टी.टी. कृष्णमाचारी ने अपने भाषण में कहा कि मैं सदन के उन लोगों में से हूं जिन्होंने बाबा साहब की बात को ध्यान से सुना है। मैं इस संविधान के ड्राफ्टिंग कमेटी में जुटे काम एवं उत्साह के बारे में जानता हूं कि संविधान का मसौदा तैयार करने में 7 सदस्यों में से एक सदस्य ने इस्तीफा दे दिया एक की मृत्यु हो गई एक संयुक्त राष्ट्र अमेरिका चले गए एक राज्य के काम में व्यस्त रहें एक या दो लोग स्वास्थ्य के कारण दिल्ली से दूर रहें और डॉक्टर अंबेडकर एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें संविधान निर्माण का सारा श्रेय जाता है। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने डॉक्टर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा संविधान निर्माण में प्रदान की गई सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि मैंने राष्ट्रपति पद के तौर पर दैनिक गतिविधियों को नजदीक से देखा है इसलिए मैं दूसरों की तुलना में अधिक प्रशंसा करते हुए बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को धन्यवाद करता हूं।

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